REMEMBER

My resilience is not your strength

And my tolerence will never be your victory

I give you space for I believe in freedom

And bear your stupidity to know your limit

But remember you are on a leash

Leash of my retaliation

Of my anger

If you destroy what I cherish

Your foolishness will not be an alibi

Your pain will not be for mercy

Then what will be will be

Swift and steady

REMEMBER

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क्या करें

क्या करें कि हमको भी
थोड़ी सी अक्ल आ जाये
उम्र के इस दौर में
हम भी थोड़ा संभल जायें
थोड़ा सा हँसे कम
और ज़रा सा मुस्कुराए
हर बात पर उछल कर
हम न बिफर जायें
ज़माने को बदलने की
इस जिद्द को थोड़ा बिसर जायें
वक्त की हालात की
संजीदगी हमको भी समझ आये
ए काश के हम जमाने से
थोड़ा सा तो डरें
और पालतू बन जायें

आज भी

साँसों मे मेरी आज भी
खुशबू सा उतरता है
आँखों में इक ख्वाब है
जो नीन्दों मे मचलता है
सवेरे के धुन्घलके मे
तू धूप सा चमकता है
आज भी मेरी जुल्फों मे
फूलों सा महकता है
यादों के मोड़ पर
तू हँसी सा खनकता है
समन्दर में अहसासों के
तू सैलाब सा उमडता है
ए प्यार तू आज भी
न जाने क्यों मेरे सीने मे धड़कता

खाँमखाँ

इस देश का साला क्या करू
जो हर साल पीछे ही खिसकता जाता है

मुस्तकबिल में इसके दिखता है धुआं
ये माज़ी की आग में ही सुलगता जाता है
हैवानियत हर चेहरे से रिसती सी है अब
इन्सानियत का रिश्ता जैसे खत्म हुआ जाता है
दुश्मन की इसको अब ज़रूरत क्या है
अपने ही चरागो से जो भस्म हुआ जाता है
इक और कत्लेआम की तैयारी में है मुल्क
सरहद पे कोई खाँमखाँ मरा जाता है ….

देख तो ले

तू देख ले साथ तेरा
छूट तो नही गया
हाथ से तेरे  हाथ किसी का
छूट तो नहीं गया
सारे रिश्ते निभाने में
कोई एक रिश्ता टूट
तो नहीं गया
तू देख तो ले इधर भी
कोई अकेला
खामोश सी आवाज़
देता ही गया

ईश्वर

तू बुद्ध तू प्रबुद्ध
मैं अहंकार
मूर्ख सतत विकार
तू व्याप्त अलौकिक प्रकाश
मै नश्वर बिन्दु समान
तू भीतर बाहर बहुआयाम
मैं जीवन मे बन्धा अज्ञानी अंधकार
तू कण तू बृहमा्न्ण
मै विस्मृत चकित पदार्थ
तू आकार तू निराकार
तू ही मेरे भीतर विद्यमान
शब्दों में नामों मे ॻन्थो मे
उलझा मै अन्भिग्य अभिमान
तू दयावान ईश्वर भगवान
करो कल्याण करो कल्याण

 

हिम्मत

ज़रूरत नही तलवार
या किसी हथियार की
हराने को तुम्हें
मेरी हिम्मत ही काफी है
मेरे बढते कदम से ही तुम
घबरा जाओगे
डराने को तुम्हें
मेरी रफ्तार ही काफी है
झूठ से दीवारें चिनाई हैं तुमने
नीव तुम्हारी दरकाने को
मेरी चिंघाड़ ही काफी है
डर के शोर से बहरी है
सेना तुम्हारी
रण छोड़ भगाने को
निशब्द प्रातिकार ही काफी है