Again

IMG4AEDHey let’s start again. Again from the bottom of the pit. Again from hell. Again from the burn, pain and guilt. Let’s start again. Let’s walk through this hell again. You may kick me, push me, punch me, throw me off the edge but trust me you won’t like the battle when I’ll come up. Because this time I’m not going back. I’ll be around when you’ll need me but don’t push me. I’ve learned to fight with beasts worse than fear and you don’t know what they are like. I’ve been there for too long. It’s time to come up. And I’ll be fine once again to fall in there because I have made quite a few friends there. But I won’t go back. It’s my fight now, my journey and my turn. I’ll walk the way on my own cuz I know how to survive the burn, the pain and the heartbreaks. I will still be fine when I’ll get these heartbreaks and pain. I’ll be fine. I’ll walk again. And when you’ll push me I’ll stand up again. After all people are always scared of the one who stood up again.
mimansa..

Advertisements

आस

कहा जिन्दगी के अन्धेरो ने
मेरे घर के जलते दियों से
बुझाने तुम्हें मैं आऊंगा हर रात
जलते रह सको है कहाँ तुममें वह बात
दिया मेरा फड़फड़ाता रहा
तेल और बाती का था उसको साथ
अन्धेरों ने हवाओं को था भेजा
जूझता रहा दिया मेरा
आस का थाम हाथ
सवेरे का उसको सहारा था
समय ने इक वादा जो निभाना था
न रहूँगा एकसा हरदम
अन्धेरों के बाद
तो रोशनी को ही आना  था …..

करते तो क्या करते

ख्वाहिशों ने जीने न दिया
तमन्नाओं ने मरने न दिया
यादों ने सोने न दिया
ख्वाबों ने जगने न दिया
करते तो क्या करते
दर्द ने हँसने न दिया
और
आस ने रोने न दिया

निशान

हर ज़ख़्म रूह पर निशान छोड़ गया
हर घाव शख्सियत हमारी बदल गया
ढूंढने पर भी न पा सके खुद को
अक्स भी अपना पराया हो गया
न जाने वक्त बदल गया
कि आइना बदल गया

बड़प्पन

बड़े हो,
तो बड़प्पन का मौका है
ले लिया जिस दिन
छोटों ने यह अधिकार
कद तुम्हारा उस दिन
बहुत अदना होगा
झुकता वही जो होता बड़ा है
छोटा तो बस बड़ा होने की
कोशिश भर कर सकता है
शक्ति मिली
गर औरों से ज्यादा
दर्शाने से बड़ेगी नही
ताकत वही
है सबसे बड़ी
जो हो सके कभी
निर्बलो के लिए खड़ी

अहसास

दर्द अब दिल को तड़पाता भी नहीं
रातों को नीन्दों से जगाता भी नहीं
वक्त ने ज़ख़्म भर दिए हैं शायद
पर ये खा़ली सा अहसास जाता भी नहीं