भाई मेरे

मान था गुमान था
बहन होने पर तेरी
मुझे बड़ा अभिमान था
पर दुआओं मे मेरी
शिद्दत न थी
ड़ोरी मे मेरी कोई ताकत न थी
बाँध न सकी बचा न सकी
तुझे नियति से छुड़ा न सकी
साथ तेरा जो छूटा
भाई मेरे
बचपन से नाता है जैसे टूटा
हाथ पकड़ तेरा
लगाई थी जो दौड़
तेज़ उससे दौड़ न पाई आज तक कभी
मार खाई ,पलट कर मारा भी था तुझे
चुगली कर मार, माँ से खिलवाई भी थी तुझे
चेहरे पे तेरे शिकन न देख
शरम भी आई थी मुझे
दोस्त था तु भाई मेरा सबसे पहला
गिल्ली डण्डा तेरे साथ ही खेला था आखिरी
और पहला पहला
दौड़ती हूँ सपनों में आज भी
हाथ थाम कर तेरा
पर पहुंच पाती हूँ नहीं कहीं
आया भी था तू संग ले जाने मुझे
बंधन इस जहान के
छोड़ न पाये  थे मुझे
इक कतरा भी तेरे प्यार का अगर
तेरे बच्चों तक पहुंचा पाऊँ
आँखें उस जहान मे तुझसे
तब शायद मैं मिला पाऊँ

ये तो वह मंजिल न थी

ये तो वह जगह नहीं
ये तो वह मंजिल न थी
पहुंचे हैं हम आज जहां
ऐसी तो कभी ख्वाहिशें न थी
चले थे ख्वाब आँखों में लेके
बसायेंगे जहान सितारों से आगे
गर्दिशो ने राह की पकड़े जो कदम
उड़ तो न पाये पर सीधी सी राह पर
चलना भी है भूल गये हम
जीती थी आज़ादी
बड़ी जिद्दोजहद से कभी
आज खुद ही हुए हैं परेशान
इक दूजे की परवाज़ों से  हम
नहीं है ये वो तस्वीर
जिसकी ताबीर सज़ाई थी आँखों में
कहाँ चूक हुई, क्यों अपनों के ही
दुश्मन बन गए हैं हमp

तुम आ ही जाती हो

 

तुम आ ही जाती हो
कभी मेले में तो कभी अकेले मे
कभी चुपके से तो कभी रेले में
तुम आ ही जाती हो
कभी दरवाजे से तो कभी किसी कोने से
सुबह की धूप सी तो कभी अघजगी रातों से
तुम आ ही जाती हो
पुरानी धुन सी कभी
तो सावन में झूलों सी कभी
तुम आ ही जाती हो
आँखों की निपोरो मे कभी
हँसी की गुदगुदी में कभी
तुम आ ही जाती हो
बीते हुए लम्हों की यादें
तुम आ ही जाती हो

 

 

 

अच्छा होता है

भीड़ से पीछे रह जाना
भी कभी अच्छा होता है
हर रिश्ता खुशी ही दे
यह ज़रूरी तो नहीं
कुछ रिश्तों को राह
मे छोड़ जाना
भी कभी अच्छा होता है
हर आँख तुम्हें सही तौले
ये ज़रूरी तो नहीं
इन तराजू से दूर
खुद को कर पाना
भी कभी अच्छा होता है
भीड़ के संग बहक जाना
ये ज़रूरी तो नहीं
गलत हो कदम तो
पाँव को अपने थाम लेना
भी कभी अच्छा होता है

निशब्द प्रतिरोध

निशब्द मेरा प्रतिरोध
गूँजेगा
अडि़ग मेरा विश्वास
न टूटेगा
अपने बनाये शीशमहल मे
हो कैद तुम
बिम्ब प्रतिबिंब जहाँ
अपना ही
है दिखता हर तरफ
डर तो लगेगा ही
पर भाग न पाओगे कहीं
क्योंकि आईने को
है बनाया
हमसफर तुमने

ईश्वर मेरा

ईश्वर मेरा मेरे दिल में रहता है
दीवारों से नही घिरा है
न ही सोने के कलश मे बन्धा है
ईश्वर मेरा मेरे दिल में रहता है
मेरे आँसुओं से धुलता है
मुस्कुराहटों से मेरी वह सजता है
ईश्वर मेरा मेरे दिल में रहता है
धड़कनों के नाद में जयकारा उसका होता है
साँसों के वेग से परचम उसका लहराता है
ईश्वर मेरा मेरे दिल में रहता है
बुराई में पैरों को मेरे जकडता है
अच्छाई मे हाथ मेरा पकडता है
ईश्वर मेरा मेरे दिल में रहता है
कर्मों में मेरे बसता है
दुनिया के इस झंझावात में
ईश्वर मेरा आज भी
मेरे दिल में ही रहता है

आहिस्ता चल

ज़रा आहिस्ता तो चल ऐ जिन्दगी
दिल को थोड़ा सा सुकून अभी आया है
जरा सा आहिस्ता चल
अब जाके कहीं आँखों में महताब आया है
थोड़ा तो आहिस्ता चल
वो रात की बाहों मे
चाँद का ढलना
वो सूरज की घुडकी से
सुबह का जगना
ज़रा सा देखने तो दे
बस थोड़ा सा तो आहिस्ता चल
वो सर्द हवाओं का ठिठुरना
वो गीली रेत पर सवेरे का चलना
वो हवाओं में
बूँदों का बहकना
वो साँसों मे घुलकर
कुहासे का लिपटना
बस आँखों में बसने तो दे
बस थोड़ा सा जीने तो दे
बस थोड़ा सा तो आहिस्ता चल
लुत्फ़ नज़ारों का
नदियाँ की धारों का
फूलों का बहारों का
वादी का पहाड़ों का
थोड़ा सा लेने तो दे
बस थोड़ा सा तो आहिस्ता चल

मोहरा

हर कोई आज एक योद्धा है
बना किसी न किसी का हथियार है
लड़ने को खड़ा हमेशा तैयार है
किसी भी बात से हो जाता नाराज है
खुद भक्त तो दूसरा गद्दार है
युद्ध के लिए करता प्रयास है
किस से लड़ना है इससे अनजान है
बन गया है मोहरा किसी का
जानता तो है
पर मानने को नहीं तैयार है

युद्ध की आहट

लगता है डर
युद्ध की आहट से
तुम्हारे द्वार तक पहुंचने से पहले
मेरे घर से होकर वो जायेगा
छाती ठोकोगे तुम विजय मे
पर सीने पर गोली मेरा अपना खायेगा
वतन रहेगा सुरक्षित हमारा
घर मेरा बस तार तार हो जायेगा
युद्ध की चाह से पहले बस
इक कतरा आँसू मेरे लिये भी रख लेना
डरतें हैं इस आग में
अस्तित्व हमारा खण्डहर हो जाएगा