कशमकश

जिन्दगी तू खेलती रही है खेल हमसे
मुझे तोड़ा, गिराया, रुलाया
मेरा लड़ना मेरे हालात से
देखती रही तू
मज़े लेती रही तू
जहाँ देखा कि
अब जायेंगे हार
ड़ाल देंगे हथियार
देकर इक छोटा सा ईनाम
तू फिर कर देती है तैयार
इक नई कशमकश के लिए …

दुनिया

लेन देन की दुनिया है
मुबारको का व्यापार है
रिश्तों को तोलते हैं
विश्वास का आभाव है
ईश्वर के तो न हो  पाये हम
बस तेरा और मेरा भगवान है
किराये की ज़मीन पर
जायज़ादे खड़ी करके
सोचते हैं खुदको
के मालिक मकान हैं

आ चल उड़े ऐ मन

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आ चल उड़े ऐ मन
नाप ले आज ये सारा गगन
नीले से अम्बर मे डूबे हम आज
और सागर मे पंख फैला ले हम परवाज़
हर तारे को चल छू कर हम आयें
और व्योम की स्याह सर्द मे खिलखिलायें
बारिश की बूँदों पर चढ़कर
आकाश को चल छू ले
खुशबू मे समायें, हर रंग में बस जायें
छाँव को सहलाये, रोशनी को पकड़ लायें
चल हवा पर बैठ करें दरिया की सैर
फ़ूलती साँसों को फिर पानी से गटक जायें
चल आज तो बस खुद को अपने से मिलायें
आ चल ऐ मन इस दुनिया से आगे निकल जायें